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वाणिज्य कर अधिकरण के अधिष्ठान से सम्बन्धित सूचना

               अधिकरण की स्थापना दिनांक 03.10.1980 को की गयी है इससे पूर्व यह विभाग न्यायाधीश पुनरीक्षण (जज रिवीजन) के नाम से जाना जाता था। वाणिज्य कर अधिकरण मे 'अध्यक्ष' विभाग का मुखिया अर्थात विभागाध्यक्ष होता है। विभागाध्यक्ष उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारी होते हैं जो प्रतिनियुक्ति पर इस विभाग में तैनात किये जाते है। वर्तमान समय में अध्यक्ष के पद पर श्री उमेश चंद्र त्रिपाठी ,H.J.S  वाणिज्य कर अधिकरण, उत्तर प्रदेश, लखनऊ उक्त पद पर कार्यरत है जिनके अधीन वर्तमान में 31 पीठ कार्यालय प्रदेश में कार्यरत हैं। जिनका न्यायिक व प्रशासनिक नियंत्रण विभगाध्यक्ष के अधीन रहता है। वाणिज्य कर अधिकरण में वैट/वाणिज्य कर से सम्बंधित द्वितीय अपीलों की सुनवाई/निर्णय  किया जाता है,  वाणिज्य  कर अधिकरण मे कार्यरत न्यायिक / विभागीय व अधिवक्ता संवर्ग के अधिकारियों का विवरण निम्न प्रकार है:- 

वाणिज्य कर अधिकरण के अधिष्ठान से सम्बन्धित सूचना

क्र० सं०

पीठ का नाम

 न्यायिक सदस्य का नाम

 विभागीय सदस्य का नाम

अधिवक्ता सदस्य का नाम

1.

 आगरा पीठ-1

श्री सुभाष चन्द्र कुलश्रेष्ठ

..........

-

2.

 आगरा पीठ-2

...........

श्री वीoकेo शुक्ला

-

3.

इलाहाबाद पीठ-1

मोo इब्राहिम

..........

-

4.

इलाहाबाद पीठ-2

..........

श्री अम्बेश श्रीवास्तव

 

5.

बरेली पीठ

श्री आलोक कुमार त्रिवेदी

..........

-

6.

गोरखपुर पीठ

..........

..........

-

7.

झॉसी पीठ

...........

..........

-

8.

कानपुर पीठ-1

श्री विवेक कुमार दुबे

..........

-

9.

कानपुर पीठ-2

..........

श्री लाल सिंह

-

10.

कानपुर पीठ-3

...........

पूनम गुप्ता

-

11.

कानपुर पीठ-4

...........

श्री सुधीर कुमार

-

12.

फैजाबाद पीठ

...........

श्री अंजनी कुमार

-

13.

लखनऊ पीठ-1

श्रीमती रेणु अग्रवाल

..........

-

14.

लखनऊ पीठ-2

...........

श्रीमती साधना त्रिपाठी

 

15.

लखनऊ पीठ-3

...........

..........

 

16.

मुरादाबाद पीठ

...........

श्री इन्द्र कुमार मिश्र

 

17.

गाजियाबाद पीठ-1

श्री सुरेंद्र कुमार सिंह

..........

-

18.

गाजियाबाद पीठ-2

...........

श्री जगदीश कुमार चौधरी

-

19.

 नोएडा पीठ-1

श्री महताब अहमद

..........

-

20.

 नोएडा पीठ-2

...........

श्री वीरेंद्र बहादुर सिंह

-

21.

 मेरठ पीठ-1

श्री प्रदीप कुमार गुप्ता

..........

-

22.

मेरठ पीठ-2

...........

..........

-

23.

मुजफ्फर नगर पीठ

...........

श्री वीoकेoराय

-

24.

वाराणसी पीठ-1

श्री रविन्द्र कुमार

..........

-

25.

वाराणसी पीठ-2

...........

श्री विनोद कुमार वर्मा

-

26.

वाराणसी पीठ-3

श्री रमाशंकर

..........

-

27.

 वाराणसी पीठ-4

...........

..........

-

28.

वाराणसी पीठ-5

...........

..........

-

29.

वाराणसी पीठ-6

...........

श्री रामबाबू चौधरी

-

30.

अलीगढ़ पीठ

सैय्यद वैज मियां

..........

-

31.

सहारनपुर पीठ

...........

श्री चंद्र केशव पटेल

-

वाणिज्य कर अधिकरण

अधिकरण:        अधिकरण से तात्पर्य अधिनियम की धारा-10  संशोधित नवीन  धारा-57  में गठित अधिकरण से है

सरकार:             सरकार से तात्पर्य उ०प्र० राज्य सरकार से है।

अध्यक्ष:             अध्यक्ष से तात्पर्य उस अधिकारी से है जो राज्य सरकार के परामर्श से मा० उच्च‍ न्यायालय द्वारा नियुक्‍त किया जाता है और जिसके पर्यवेक्षण तथा नियंत्रण में अधिकरण के मुख्यालय सहित समस्त सदस्य तथा पीठ कार्यालय कार्य करते हैं।

अपील:             अपील से तात्पर्य उन अपीलों से है जो व्यापार कर अधिनियम की धारा-35, 10(बी) (9) तथा 4-ए(3) संशोधित नवीन धाराएं धारा-55,  धारा-48(7),  धारा-56,  धारा-10(बी)  धारा 4 AA-3, धारा-59  में विभिन्न अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों के विरूद्ध अधिकरण के समक्ष राहत हेतु प्रस्तुत की जायेगी।

विविध:             विविध प्रार्थना पत्र से तात्पर्य उन प्रार्थना पत्रों से है जो अधिकरण के निर्णयों में पायी गयी त्रुटि के निवारण अथवा अन्य राहत हेतु प्रस्तुत किये जायेगें।

वाणिज्य कर अधिकरण का मुख्य कार्य व्यापार/वाणिज्य कर से सम्बन्धित द्वितीय अपीलों के निस्तारण का है जिसका वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जा रहा है:-

  1. सदस्‍य न्याय पीठ (एक सदस्यीय) का तात्पर्य उ० प्र० वाणिज्य कर नियमावली के नियम-69 के उपनियम-3 के अधीन गठित अधिकरण की एक न्याय पीठ से है और इसके अन्तगर्त अध्यक्ष की न्याय पीठ भी है।

  2. खण्ड न्याय पीठ (दो सदस्यीय) का तात्पर्य ऐसी एक न्याय पीठ से है जिसमें यथासाध्य कम से कम एक सदस्य उच्च न्यायिक सेवा का और एक अन्य सदस्य हो।

  3. पूर्ण न्याय पीठ (तीन सदस्यीय) का तार्त्पय तीन सदस्यों की ऐसी न्याय पीठ से है जिसमें उच्च्तर न्यायिक सेवा का कम से कम एक सदस्य या अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य हो।

  4. वृहत्तर न्याय पीठ (पॉच सदस्यीय) का तात्पर्य ऐसी अपीलों के निस्तारण के लिए जिनमें सारवान महत्व का विधि प्रश्न अर्न्तग्रस्त, अधिनियम की धारा-10 की उपधारा -9 के अधीन अध्यक्ष के सामान्य या विर्निदिष्ट आदेश से समय-समय पर गठित अधिकरण के तीन से अधिक सदस्यों की न्याय पीठ से है जिसमें अध्यक्ष सहित कम से कम आधे उच्च्तर न्यायिक सेवा के सदस्य और शेष अन्य सदस्य हों।

  5. निबन्धक (रजिस्ट्रार) का तात्पर्य शासन द्वारा तैनात ऐसे अधिकारी से है जो अध्यक्ष द्वारा समय-समय पर उसे सौपें गये कार्या हेतु उत्तरदायी हो।

  6. मुन्सरिम का तात्पर्य अधिकरण की एक न्याय पीठ के प्रधान लिपिक से है और इसके अन्तर्गत ऐसे अन्य पदधारी, जिन्हे अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत किया जाए।

  7. अध्यक्ष के नियंत्रण मे सदस्यों द्वारा वाणिज्य कर अधिनियम की धारा-10  संशोधित नवीन धारा-57  के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों एवं मा० उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों को दृष्टिगत रखते हुए  न्यायिक कार्य का सम्पादन किया जाता है। जिनके कार्यो का पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण अध्यक्ष, वाणिज्य कर अधिकरण द्वारा समय-समय पर किया जाता है। वाणिज्य कर अधिकरण में व्यापारियों / कमिश्नर व्यापार कर द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली द्वितीय अपीलों मे निहित विवादित धनाराशि रू० 2,00,000 /- तक की अपीलों की सुनवाई एक सदस्यीय खण्ड पीठ तथा 2,00,000 /- से अधिक विवादित धनराशि की सुनवाई दो सदस्यीय खण्ड पीठ द्वारा तथा धारा-4 ए, 4-ए(3) एवं धारा-35  से सम्बन्धित अपीलों की सुनवाई अध्यक्ष, वाणिज्य कर अधिकरण, उ०प्र० लखनऊ द्वारा गठित पूर्ण पीठ मे की जाती है।

 

 

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